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हम सभी के लिए प्रत्येक दिवस पर्यावरण दिवस होना चाहिए :अरविन्द यादव

हम सभी के लिए प्रत्येक दिवस पर्यावरण दिवस होना चाहिए :अरविन्द यादव

गाजीपुर जखनियां: पर्यायवरण दिवस पर पर्यायवरणविद् एवं जिला संगठन आयुक्त अरविन्द कुमार यादव ने वृक्षारोपण कर सभी को शुभकामनाएं दी | तथा अपने घर की जमीन पर बागवानी लगा क्षेत्र के लिये मिसाल कायम कर दी है।तथा हो रहे पर्यायवरण असंतुलन के प्रति चिन्ता व्यक्त करते हुए , कहा कि आज के समय में जब पूरी कायनात एक वायरस के जानलेवा हमले से जूझ रही हैं, ये समय हम सभी के लिए प्रकृति और अपने प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने के साथ साथ प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी व जबरदस्त दोहन के कारण से मानवीय जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव पर एक खुले मन से और पूरी ईमानदारी और गंभीरता से चिंतन मनन करनें का समय है , कि अपनी प्रकृति को संरक्षित करने के नाम पर करोड़ों अरबों रूपए खर्च करने के बाद भी स्तिथि बद से बदतर क्यों होती जा रही हैं। अगर हम आंकड़ों की बात करें तो इस जिले में कोई वन क्षेत्र शामिल नहीं है। उत्तर प्रदेश स्तर पर हरियाली का यह आंकड़ा केवल 5.95 प्रतिशत है | और राष्ट्रिय स्तर पर हरियाली केवल 20.60 प्रतिशत ही बची है , जो कि राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार 33 प्रतिशत होनी चाहिए। देश की बेहिसाब बढ़ती हुई , जनसँख्या के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी बेतहाशा बढ़ता ही जा रहा हैं।

अनेकानेक योजनाएं बनती हैं , लेकिन बहुत सी योजनाएं सरकारी फाइलों से निकलकर ज़मीन      पर नहीं आ पातीं | आखिर कब तक कुछ स्वार्थी लोगो, प्रशासनिक अधिकारीयों, कुछ नेताओ और सामाजिक माफियाओं का गठजोड़ सरकारी फाइलों में हरियाली बढ़ाते रहेंगे |असंतुलित विकास कार्यों की योजना बना कर ‘विकास के नाम पर विनाश’ करते रहेंगे, कब तक वनों के कटान के साथ आग   के हवाले कर जैव विविधतता बर्बाद करते रहेंगे | .. आम जनता, मीडिया और कथित सामाजिक कार्यकर्ता हर बात के लिए तो सरकार को जिम्मेदार तो ठहरा देतें हैं  , लेकिन इनमे से किसी का भी साहस भ्रष्ट सामाजिक माफियाओं, अफसरों पर सवाल उठाने का क्यों नहीं होता कि दशकों तक करोडो रूपए खर्च कर करोड़ों पौधे रोपित किए  जाते हैं | हर साल गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड   में कथित उपलब्धि दर्ज होती है |लेकिन करोड़ों अरबों रुपये ठिकाने लगाने के बाद भी साल दर  साल हरियाली घटती जा रही है। इसलिए प्रश्न तो बनता   हैं | आखिर कब तक पेड़ों को काटकर कागज़ बनातें रहेंगे , और उन्हीं कागजों पर लिखेंगे कि पेड़ बचाओ जंगल बचाओ .. आखिर कब तक ? आज हर गांव, गली, मोहल्ले में होड़ मची हुई है ,   हर आदमी पर्यावरणविद् , हरित मानव, धरती पुत्र, तालाब पुत्र, पेड़ पुत्री, नदी मानव, जल मानव और भी अनगिनत उपाधियां अपने आप को ही अलंकृत करने की ..

इन छदम मानवों की अपनी अपनी जबरदस्त मार्केटिंग चल रही हैं , यदि इतनी ऊर्जा ज़मीनी    स्तर पर हरियाली सहेजने में की जाती तो शायद तस्वीर बदल सकती थी। और आप जमीनी स्तर    पर कार्य करने की जगह जूम मीटिंग, बेबीनार – सेमिनार, चित्रकला, स्लोगन, दीवारों पर पेंटिंग, रैली, वाद विवाद प्रतियोगिता, फैन्सी ड्रेस प्रतियोगिता  और साल में एक बार पर्यावरण दिवस की नौटंकी करते रहे और सब कुछ हाथों से निकल गया। अब युद्धस्तर पर ज़मीनी स्तर पर कार्य करने का समय आ गया हैं |और इसके लिए हम सभी को ‘प्रत्येक दिवस पर्यावरण दिवस’ के रूप में अपनाने की आवश्यकता है। हम सभी को संकल्पित होकर प्रत्येक दिवस पर्यावरण दिवस और हमारा प्रत्येक कदम हरियाली सहेजने की ओर होना चाहिये।   सभी भारतवासियो की नैतिक जिम्मेदारी बनती      है कि सब मिलकर हरियाली को बचाए और जब   भी अवसर मिले पौधारोपण अवश्य करें और अब पौधारोपण को एक जन आंदोलन का रूप देना चाहिये। किसी का जन्म दिन हो, या कोई और शुभ अवसर या अपने प्रियजनों की स्मृति एक – एक पौधा रोपित अवश्य कीजिये, एक दूसरे को उपहार में भी पौधों का प्रयोग किया जाए तो निश्चित रूप से हम अपनी पृथ्वी की हरियाली सहेजने में सफल होंगे |

रिपोर्टर संवाददाता –

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