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आखिर जिम्मेदार कौन ? पुलिस की मौजूदगी में घटना होने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सका ।

अफसरों व झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में फस कर गई , प्रसूता की जान ।

आखिर जिम्मेदार कौन ? पुलिस की मौजूदगी में घटना होने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सका ।

सुजीत कुमार सिंह

गाजीपुर जनपद में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और झोलाछाप चिकित्सकों के काकस में फसकर एक निजी अस्पताल संचालक ने प्रसूता की जान ले लिया । डिलीवरी के समय पैदा हुए , दो मासूम धरती पर कदम रखते ही बेसहारा हो गए । हालत इतनी बदतर है कि प्रसूता को अस्पताल में दाखिल आशा बहू ने कराया । घटना के बाद थाने में पहुंचे पीड़ितों को न्याय देने के बजाय इलाकाई पुलिस ने उन्हें धमका कर घर भगा दिया । मानवता को तार-तार करने वाली इस वारदात से इलाके में प्रशासन व पुलिस की किरकिरी हो रही है । पीड़ित परिवार बेजार हैं और अपने साथ हुई , इस घटना को लेकर सदमे में है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जखनियां तहसील के शादियाबाद कस्बे से सटे बबूरहनी गांव निवासी महेश बिंद की ससुराल नंदगंज थाना क्षेत्र के बहेड़ी इलाके में स्थित किसी गांव में है । महेश की पत्नी प्रेग्नेंट थी , जिसके चलते उसके पिता व भाई ससुराल से बेटी को विदा कराकर अपने घर लेकर चले आए और डिलीवरी का समय नजदीक आने के बाद गांव में तैनात आशा बहू से सहयोग मांगा । आशा बहू के ही कहने पर परिजनों ने महेश की पत्नी को इलाके में स्थित चोचकपुर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया । एक दिन बाद आशा बहू ने अपनी कारस्तानी दिखाते हुए , गर्भवती महिला को नंदगंज इलाके में स्थित बरहपुर गांव के पास लंबे समय से चल रहे , बगैर रजिस्ट्रेशन के शिवांगी अस्पताल में भर्ती कराया । जहां एक बच्चे की नार्मल डिलीवरी हुई , लेकिन पेट में जुड़वा बच्चा होने के कारण एक बच्चा फस गया। प्रसूता की तबीयत का हवाला देकर अस्पताल कर्मियों ने उसके पति को ब्लड की जरूरत बताकर जिला मुख्यालय भेज दिया । और बिना किसी चिकित्सक की मौजूदगी में ही मौजूद स्टाफ में ऑपरेशन करने का ही प्रयास किया ।इसी बीच अनुभव की कमी के चलते प्रसूता की दर्दनाक मौत हो गई । तत्पश्चात दूसरा बच्चा भी पैदा हो गया , अस्पताल में मौजूद परिजनों को किसी बात को लेकर शक हुआ , और अस्पताल के सामने हंगामा करने लगे । इस बात को जान अगल बगल भीड़ भी इकट्ठा हो गई । बिना रजिस्ट्रेशन के लंबे समय से चल रहे , इस अस्पताल में कई लोगों की जान जाने का भी आरोप है । इस बात को जानकर हंगामा बढ़ने लगा और पीड़ित परिजनों की सूचना पर नंदगंज थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई । महेश बिंद के भाई व पिता का आरोप है कि इलाकाई पुलिस ने उनकी तहरीर भी नहीं ली । और कहा कि जिस थाना क्षेत्र में तुम लोगों का घर है , वहां जाकर मुकदमा दर्ज कराओ। पत्नी की मौत और तत्काल पैदा हुए , मासूमों की हालत देख कर परिजनों ने अपने बच्चों और मृतक की लाश को लेकर घर चले गए । और इसके बाद लगातार टेलीफोन व अन्य माध्यमों से अपने रिश्तेदारों व संबंधितो से हुई , घटना में मदद करने की गुहार लगाने लगे ।मनमानी का आलम यह रहा कि मृत्यु महिला का पोस्टमार्टम भी नहीं हो सका । महेश ने आरोप लगाया कि मेरी पत्नी जब मर गई , तो उसे बेहतर इलाज के नाम पर वाराणसी ले जाने का हवाला देकर एंबुलेंस भाड़े के नाम पर 3500 सौ रुपए अलग से वसूले गए । और वाराणसी जा रही , एंबुलेंस रास्ते से वापस आ गई और मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया गया ।पुलिस की अनदेखी व अपने साथ हुई , इस घिनौनी वारदात से परेशान हाल पीड़ित दलित परिवार सहमा हुआ है ।इस मामले में पीड़ित ने जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह व मौजूदा सीएमओ हरिगोविंद सिंह से भी निवेदन किया है । और मामले की जांच करने के साथ-साथ पैदा होने वाले मासूमों को बेसहारा बनाने वाले अस्पताल संचालक पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं । जिसकी चर्चा का विषय बना है ।

रिपोर्टर संवाददाता –

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