



बरही गांव में महिला चिकित्सालय बंद करने के आदेश पर ग्रामीणों का विरोध, मंत्री ने कहा—अस्पताल नहीं होगा बंद
सुजीत कुमार सिंह
गाजीपुर: – प्रदेश में जहां योगी आदित्यनाथ सरकार आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास में लगी है , वहीं स्थानीय स्तर पर अधिकारियों के निर्णय सवालों के घेरे में आ रहे हैं । ऐसा ही एक मामला मरदह क्षेत्र के बरही गांव से सामने आया है , जहां वर्षों से निजी भवन में संचालित राजकीय महिला चिकित्सालय को जर्जर बताकर बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है । सीएमओ कार्यालय की ओर से अस्पताल पर तैनात मेडिकल स्टाफ के अन्यत्र स्थानांतरण का आदेश जारी होते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। सूचना मिलते ही दर्जनों की संख्या में महिला एवं पुरुष अस्पताल परिसर में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने लगे ।


*रोजाना 20-25 मरीजों का होता है इलाज*
ग्रामीणों के अनुसार इस चिकित्सालय में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज इलाज के लिए आते हैं। बरही के अलावा आसपास के गांवों से भी महिलाएं, पुरुष और बच्चे यहां उपचार के लिए निर्भर हैं। अस्पताल बंद होने से ग्रामीणों के सामने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है ।

*निजी भवन में वर्षों से संचालित अस्पताल*
बताया जाता है कि यह राजकीय महिला चिकित्सालय लंबे समय से निजी भवन में संचालित हो रहा है। अब तक विभाग की ओर से स्थायी सरकारी भवन निर्माण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भवन को जर्जर बताया जा रहा है, वह अभी भी उपयोग के योग्य है।

*ग्रामीणों ने जताया कड़ा विरोध*
ग्रामीण तेजबहादुर सिंह ने अस्पताल हटाने के आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। नरेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि किसी भी हालत में अस्पताल को गांव से हटने नहीं दिया जाएगा। महिलाओं ने भी आदेश को गलत बताते हुए उच्चाधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने की बात कही।

*डॉक्टर के बिना चल रहा अस्पताल*
अस्पताल में कुल 5 कर्मचारियों की तैनाती है, जिसमें एक फार्मासिस्ट, एक एएनएम, एक वार्ड सहायिका, एक सफाईकर्मी और एक चौकीदार शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि पिछले 4-5 वर्षों से यहां किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है।

*सीएमओ ने दी सफाई*
मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुनील पांडे ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार महिला चिकित्सालय में महिला डॉक्टर की तैनाती अनिवार्य है। बिना महिला डॉक्टर के अस्पताल का संचालन संभव नहीं है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

*प्रभारी मंत्री ने लिया संज्ञान*
मामला जब जिले के प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल के संज्ञान में पहुंचा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी हालत में अस्पताल बंद नहीं होने दिया जाएगा ।


रिपोर्टर संवाददाता –





