उत्तर प्रदेश

बेसिक शिक्षा विभाग में ‘अंधेरगर्दी’, लापरवाह शिक्षकों पर मेहरबान अधिकारी , कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति

बेसिक शिक्षा विभाग में ‘अंधेरगर्दी’, लापरवाह शिक्षकों पर मेहरबान अधिकारी , कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति

सुजीत कुमार सिंह

​गाजीपुर – जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में इन दिनों सब   कुछ ठीक नहीं चल रहा है । जिले के परिषदीय विद्यालयों में पठन- पठन की व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है । आलम यह है कि विद्यालयों से अध्यापक गायब मिल रहे हैं । और छात्र संख्या लगातार घट रही है , लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे हुए हैं । सूत्रों की मानें तो इस खामोशी के पीछे ‘मोटा खेल’ चल रहा है। जबकि ​जिले के मरदह और बिरनो क्षेत्र के स्कूलों में स्थिति और भी बदतर है। यहाँ अध्यापकों और बच्चों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि विद्यालय केवल कागजों पर ही आदर्श बने हुए     हैं । धरातल पर कई स्कूल समय से नहीं खुल पाते हैं , वही  ताले लटके मिलते हैं या फिर इक्का-दुक्का छात्र ही नजर आते  हैं । ताज्जुब की बात यह है कि संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सब कुछ जानते हुए भी अंजान बने हुए हैं । और निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं , जिससे लापरवाह शिक्षकों के हौसले बुलंद हैं । बिरनो शिक्षा  क्षेत्र के कई ऐसे विद्यालय है , जहां अनुपस्थिति के बदले ‘वसूली’ का खेल ​शिक्षा विभाग के गलियारों में यह चर्चा आम है कि गैरहाजिर रहने वाले अध्यापकों से विभाग के कुछ निचले स्तर   के कर्मचारी और अधिकारी सांठगांठ कर ‘मोटा रकम’ वसूल  रहे हैं । वहीं उपस्थिति रजिस्टर में हाजिरी लगवाने और निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति पर पर्दा डालने के नाम पर धन उगाही की जा रही है । यही कारण है कि गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद भी किसी बड़े एक्शन की खबर सामने नहीं आती । जबकि बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा की कार्यप्रणाली   पर सवाल उठ रहे हैं । वहीं ​जिले की बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध नजर आ रही है। बार-बार मिल रही , शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स के बावजूद, दोषी शिक्षकों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने से बीएसए कतरा रही हैं । अधिकारियों की यह ‘मौज’ छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रही है । अभिभावकों का कहना है कि सरकार शिक्षा पर करोड़ों खर्च कर रही है , लेकिन जिले के अधिकारियों की मिलीभगत से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था वेंटिलेटर पर पहुंच गई है । जबकि बेसिक शिक्षा अधिकारी को कई बार जानकारी देने के बाद भी मामले का संज्ञान नहीं लेती  है । ​अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद प्रशासन क्या सुध लेता है या फिर भ्रष्टाचार का यह खेल इसी तरह निर्बाध चलता रहेगा ।

रिपोर्टर संवाददाता –

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